सप्तपदी
सात वचन सात जन्मो तक निभाऊंगी देकर खुशियां सारी तुमको सारे गम सह जाऊंगी तुम से जुड़े हर रिश्ते को मैं अपना रिश्ता बनाऊंगी सात वचन सात जन्मो तक निभाऊंगी कठिनाइयों को तुम तक पहुंचने से पहले मेरा सामना करना पड़ेगा पर एक बात सोच लो मैं जो रूठी तो तुम को भी मनाना पड़ेगा यूं ही हंसते हंसते यह जिंदगी बिताऊंगी सात वचन सात जन्मों तक निभाऊंगी प्रीत की इस डोर में कभी न कोई गांठ आए सुख की इस लहर में दुःख की कभी ना भवर आए दुख की चट्टाने हो कितनी भी प्रबल हमें देख वह टूट जाए आपको अपना स्वाभिमान बनाऊंगी सात वचन सात जन्मो तक निभाऊंगी