तुम्हारा दृढ़ विश्वास

पृथक नहीं अद्वैत नहीं,
 यह भाव तुम्हारा कब होगा।
 शांत नहीं विद्रोह नहीं,
 वह प्रेम तुम्हारा कब होगा ।।
नभ की सुनी चादर बुनना,
 यह काम तुम्हारा कब होगा।
 वृहत नहीं जो सूक्ष्म नहीं जो ,
वह अभ्यूत्थान तुम्हारा कब होगा।।
 अंधविश्वासो में डूबे हो,
 आत्मविश्वास जागृत कब होगा ।
जब आंखे खोलो तभी भोर,
 मत देखो विफलताओं की ओर।।
 जब कर्तव्य को समझोगे अपने ,
उत्थान तुम्हारा तब होगा ।
गर्व बनोगे मातृभूमि का जब  ,
सम्मान तुम्हारा तब होगा।।
 रवि शिखर के पीछे डूबा है ,
उदय मध्य में कब होगा।
  त्रेकालिक विद्रोह है यह,
 नष्ट कभी तो यह होगा ।।
तुम काट नहीं सकते जिसको ,
यह उस विष का अमृत होगा।
 जब सूर्य से ऊपर चमकोगे,
  सफल जन्म तुम्हारा तब होगा ।।
कुरीतियों की दीवार खड़ी है ,
खण्डन उसका तब होगा।
 जब अडिग रहोगे कर्मों पर,
 सुखद हिंदुस्तान तुम्हारा तब होगा ।।

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