पाती आयी पाती आयी

प्राची से दिनकर की एक किरण 
पृथ्वी पर आकर फैल गई
स्वर्णिम स्याही छिटक गई 
प्रभात का संदेशा लाई
 पाती आई पाती आई
तरु तरुवर फिर से झूम उठे 
धरती पर हरियाली छाई
पुष्पों की डाली अंगड़ाई
प्रकृति का संदेशा लाई
पाती आई पाती आई 
खलिहानो में शोर मचा
गेहूं की बाली लहराई
सरसों के फूलों की सुगंध
बसंत का संदेशा लाई
पाती आई पाती आई
श्वेत गौर शशि की काया
उदयाचल पर फैल गयी
दिव्यपुंज की धुतिमा
धूमकेतु का संदेशा लाई
पाती आई पाती आई
पवन लहर ने तन को छूकर
मन को शीतलता पहुंचायी
संग सुगंध कमलिनी की
अधरो की लाली बन मुस्काई
पाती आई पाती आई
उलझे केशो की अलके
बन घटा नयन पर छा गईं 
कलाईयों के कंगन खनक उठे
हाथो की मेंहदी महक उठी
पाती आई पाती आई

  

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