आत्मबल जागृति
दूत राम राज्य का, बुद्धि का प्रतीक हूं।।
स्वप्न स्वर्ग का लिए ,ज्ञान का चिराग हूं।
ललाम ज्योति व्योम की, भूमि का प्रकाश हूं।।
यह धरा है सो रही, यह मनुष्य है सो रहे।
नींद के खुमार में, कार्य शक्ति खो रहे ।।
उठो जगो हे मनुष्य, पूर्व का प्रकाश हूं ।
आज के विहान और ,ज्ञान का चिराग हूं ।।
मान्य तो नवीन है ,है नवीन विचार भी।
धारणा नवीन है, राह भी नयी-नयी।।
टूक-टूक हो चुकी, रूढ़ियां कुरीतियां ।
मिन्तिया जड़ान्ध की, खंड-खंड हो चुकी।।
कामना नवीन ले, आज मैं खड़ा हुआ ।
उठो जगो प्रकाश ले, बिहान गीत गा रहे।।
जगत के उत्थान की ,राह नयी बना रहे......!
बहुत ही प्यारी रचना है है मईया
ReplyDeleteराधे कृष्ण 🙏🙏
सहृदय आभार मेरी लाडो
Delete।। राधे राधे।।