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Showing posts from August, 2020

●●●कुछ तो सोचा होगा मैंने●●●

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 कुछ तो सोचा होगा मैंने.......!  है जन्म मेरा यह मर्यादा का मर्यादित हूं अपनी भावनाओं पर।  जानकर अनजान रहना है यही प्रवृत्ति मेरी।  अब तो पहचान गए होगे कि कौन हूं मैं ? हां मैं अबला हूं ...... वह मुकुट जो देवी के सर पर चढ़ा है, है बड़े ही पहरे उस पर कुछ ऐसा ही है जीवन मेरा  क्या जन्म मेरा छुप-छुपकर कर ही जीना है,  क्या स्त्री को बस यही सहना है ।। मायका रहा बड़ा सलोना पर कुछ तो था मुझको सहना।  पीहर के थे सपने स्वर्णिम पर भाग्य ने कैसा खेल किया।  हाय यह क्या हुआ कुछ ऐसा हुआ जो कहा नहीं गया।।  छोड़ दिया अपने अस्तित्व को , विस्मरण किया कि कौन हूं मैं ? बावर्ची हूं या हूं धोबिन या तुलना मेरी नौकरानी की, पता नहीं क्या आस्तित्व है मेरा भूल गई कि कौन हूं मैं.......!

आत्मबल जागृति

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भीम का लहू लिए, ज्ञान कृष्ण का लिये।   दूत राम राज्य का, बुद्धि का प्रतीक हूं।।  स्वप्न स्वर्ग का लिए ,ज्ञान का चिराग हूं।  ललाम ज्योति व्योम की, भूमि का प्रकाश हूं।।  यह धरा है सो रही, यह मनुष्य है सो रहे।  नींद के खुमार में, कार्य शक्ति खो रहे ।। उठो जगो हे मनुष्य, पूर्व का प्रकाश हूं । आज के विहान और ,ज्ञान का चिराग हूं ।। मान्य तो नवीन है ,है नवीन विचार भी।  धारणा नवीन है, राह भी नयी-नयी।।  टूक-टूक हो चुकी, रूढ़ियां कुरीतियां । मिन्तिया जड़ान्ध की, खंड-खंड हो चुकी।।  कामना नवीन ले, आज मैं खड़ा हुआ । उठो जगो प्रकाश ले, बिहान गीत गा रहे।।  जगत के उत्थान की ,राह नयी बना रहे......!

●●●मेरी अंतिम इच्छा पूर्ण करने की कोशिश करना●●●

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मेरी अंतिम श्वास तक ,  मेरी अंतिम इच्छा पूर्ण  करने की कोशिश करना...... पलाश पुष्पों की वरमाला पहनाकर,  मुझे अपनी वनिता  बनाने की कोशिश करना...... मेरी अंत्येष्टि क्रिया तुम्हारे हाथ हो,  मेरी अस्थियां अपनी अंजलि से,  विष्णुपदी तक पहुंचाने की  कोशिश करना।  मेरी अंत्येष्टि तक  मेरे साथ रहने की कोशिश करना......  जड़ता अनिमेष द्वार को निहारती है,  हृदय प्रचंड रूप लिए हुए हैं,  नेत्रों को अश्रुलीन होने से पूर्व,  समक्ष आने की कोशिश करना ....... मेरी अंतिम इच्छा पूर्ण करने की  कोशिश करना..... अध्यक्षर शुष्क कंठ को रूंधे है , हृदय मे वेदना  के पषाण टूटते हैं । मृत्यु अनहलक वाचनकारी , चतुर्दिक दिखती हाहाकारी ।। खोज पथ मार्ग कोई , मुझ तक पहुंचने की कोशिश करना........  मेरी अन्तिम इच्छा पूर्ण करने   की  कोशिश  करना.........  एषणा हृदय मे मात्र यही,  आवसाद नहीं है और कोई । ठहर श्वास अंतिम का हो जब,  अभ्यागत देख नयन ढाके तब।। नही याचना  दिव की मुझको,    अंतस्थ हृ...

तितीर्षा

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                ●●●●●● तितीर्षा●●●●●●● मेरी देह भस्म से सच्चे निश्चल निस्वार्थ  प्रेम की ही गंध पाओगे । जो टटोलोगे मेरे अंतस्थ हृदय को  तो स्वयं का वहां चित्र पाओगे।।  तुम्हारे और मेरे मध्य वही अन्वय है , जो हरसिंगार का उसके नाम से है।  श्रंगार तो उपस्थित हैं सारे , फिर भी दुखांत तरु कहलाता है ।। क्या हरसिंगार को उसके उपनाम से  दूर कर पाओगे..........?  जो टटोलोगे मेरे अंतस्थ हृदय को  तो स्वयं का  वहाँ चित्र पाओगे .......... मुस्कुरा दो संभवत यही स्मृति मात्र शेष बचेगी , मैंने तो हृदय की आंखों से देख लिया।  पर तुम्हें देखे बिना इन नेत्रो की,  पिपासा कैसे बुझेगी।।  विलंब मत करो वरना  अवशेष भी नहीं पाओगे .........! जो टटोलोगे मेरे अंतस्थ हृदय को  तो स्वयं का वहां चित्र पाओगे........  ये काव्य नहीं यह हृदय की करुणा है,  तुम तक पहुंच जाए इसकी आंह  तो सार्थक यह कहना है ।  क्या मेरे नेत्रों से मेरी  गुप्त वेदना पढ़ पाओगे .......? जो टटोलो के ...