////////हिंदी साहित्य आलोचना संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य/////////🌺🌺🌺🌺🌺
चीटीं से लेकर हाथी पर्यन्त पशु, भिक्षुक से लेकर राजा पर्यन्त मनुष्य, बिन्दु से लेकर समुद्र पर्यन्त जल, अनन्त आकाश, अनन्त पृथ्वी, अनन्त पर्वत सभी पर कविता हो सकती है।’’ – आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी (रसज्ञ रंजन (1920)) ⇒ किसी भी अवस्था के अनुकरण को नाट्य कहते है।’’ – श्याम सुन्दर दास (रूपक रहस्य) ⇒ ’’हमें अपनी दृष्टि से दूसरे देशों के साहित्य को देखना होगा, दूसरे देशों की दृष्टि से अपने साहित्य को नहीं।’’ – आचार्य शुक्ल (चिंतामणि भाग-2) जिस प्रकार आत्मा की मुक्तावस्था ज्ञान-दशा कहलाती है, उसी प्रकार हृदय की यह मुक्तावस्था रस दशा कहलाती है।’’ – आचार्य शुक्ल (रस मीमांसा) ⇒ ’सर्वभूत को आत्मभूत करके अनुभव करना ही काव्य का चरम लक्ष्य है। – आचार्य शुक्ल (काव्य में प्राकृतिक दर्शन) ⇒ जिस कवि में कल्पना की समाहार-शक्ति के साथ भाषा की समास-शक्ति जितनी ही अधिक होगी, उतना ही वह मुक्तक की रचना में सफल होगा। यह क्षमता बिहारी में पूर्ण रूप से वर्तमान ’’थी। – आचार्य शुक्ल (हिन्दी साहित्य का इतिहास) ये (घनानन्द) साक्षात् रस-मूर्ति और ब्रज भाषा के प्रधान स्तंभों में है। प्रेम की गूढ़ अन्तर्दशा का ...